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श्रम दिवस पर एक नवगीत - अवनीश सिंह चौहान

abnish-7वह परवाज़
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धूप सुनहरी माँग रहा है
रामभरोसे आज

 

नदी चढ़ी है
सागर गहरा
पार उसे ही करना
सोच रहा वह
नैया छोटी
और धार पर तिरना

 

छोटे-छोटे चप्पू मेरे
साहस-धीरज-लाज

 

खून-पसीना
बो-बोकर वह 
फसलें नई उगाए
तोता-मैना की 
बातों से
उसका मन घबराए

 

चिड़ियाँ चहकें डाल-डाल पर
करें पेड़ पर राज

 

घड़ियालों का
अपना घर है
उनको भी तो जीना
पानी तो है
सबका जीवन
जल की मीन-नगीना

 

पंख सभी के छुएँ शिखर को
प्रभु दे, वह परवाज़


 

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