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कविता — अवनीश सिंह चौहान

geet-2अवनीश सिंह चौहान का यह गीत रचना-प्रक्रिया को बड़ी साफगोई से उद्घाटित करता है :

 

कविता

 

हम जीते हैं
सीधा-सीधा
कविता काट-छाँट करती है

 

कहना सरल कि
जो हम जीते
वो लिखते हैं
कविता-जीवन
एक-दूसरे में
ढलते हैं

 

हम भूले
जिन खास क्षणों को
कविता याद उन्हें रखती है

 

कविता
याद कराती रहती है
वे सपने
बहुत चाहने पर जो
हो न सके
हैं अपने

 

पिछड़ गए हम
शायद - हमसे
कविता कुछ आगे चलती है।


 

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