ISSN 2277 260X   

 

International Journal of

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Monday, 16. April 2018 - 14:09 Uhr

पीते-पीते आज करीना - अवनीश सिंह चौहान


ab-singh---copy-2पीते-पीते आज करीना
बात पते की बोल गयी

 

यह तो सच है शब्द हमारे
होते ​हैं घर अवदानी
​घर जैसे कलरव बगिया में
मीठा नदिया का पानी

 

मृदु भाषा में एक अजनबी
का वह जिगर टटोल गयी

 

प्यार-व्यार ​तो एक दिखावा
होटल के इस कमरे में
नज़र बचाकर मिलने में भी
​मिलना कैद कैमरे में

 

​पलटी जब भी हवा निगोड़ी
बन्द डायरी खोल गयी

 

​बिन मकसद के प्रेम-जिन्दगी
कितनी​ है झूठी​-​सच्ची
आकर्षण में छुपा विकर्षण
बता रही अमिया कच्ची

 

​जीवन की शुरुआत वासना?​
​समझो माहुर घोल गयी


 


Tags: Hindi Literature Hindi Lyrics Literature Festival, Authors, Media, Cinema, Actors Abnish Singh Chauhan अवनीश सिंह चौहान डॉ अवनीश सिंह चौहान 

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