ISSN 2277 260X   

 

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Sunday, 19. August 2018 - 19:51 Uhr

बदरा आए - अवनीश सिंह चौहान


abnish-singh-may-2017धरती पर है धुंध

गगन में
घिर-घिर बदरा आए

 

लगे इन्द्र की पूजा करने
नम्बर दो के जल से
पाप-बोध से भरी
धरा पर
बदरा क्योंकर बरसे

 

कृपा-वृष्टि हो
बेकसूर पर
हाँफ रहे चैपाए

 

हुए दिगम्बर पेड़, परिन्दे-
हैं कोटर में दुबके
नंगे पाँव
फँसा भुलभुल में
छोटा बच्चा सुबके

 

धुन कजरी की
और सुहागिन का
टोना फल जाए

 

सूखा औ’ महँगाई दोनों
मिलते बाँध मुरैठे
दबे माल को
बनिक निकाले
दुगना-तिगुना ऐंठे

 

डूबें जल में
खेत, हरित हों
खुरपी काम कमाए


 


Tags: Hindi Literature Hindi गीत  Dr Abnish Singh अवनीश सिंह चौहान  Abnish Singh Chauhan Hindi Lyrics 

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Tuesday, 31. July 2018 - 13:53 Uhr

देह बनी रोटी का ज़रिया - डॉ अवनीश सिंह चौहान


abnish2-3वक़्त बना जब उसका छलिया
देह बनी रोटी का ज़रिया

 

ठोंक-बजाकर देखा आखिर
जमा न कोई भी बंदा
'पेटइ' ख़ातिर सिर्फ बचा था
न्यूड मॉडलिंग का धंधा

 

व्यंग्य जगत का झेल करीना
पाल रही है अपनी बिटिया

 

चलने को चलना पड़ता है
तनहा चला नहीं जाता
एक अकेले पहिए को तो
गाड़ी कहा नहीं जाता

 

जब-जब नारी सरपट दौड़ी
बीच राह में टूटी बिछिया

 

मूढ़-तुला पर तुल जाते जब
अर्पण और समर्पण भी
विकट परिस्थिति में होता है
तभी आधुनिक जीवन भी

 

तट पर नाविक मुकर गया है
उफन-उफन कर बहती नदिया।


 


Tags: डॉ अवनीश सिंह चौहान Abnish Singh Chauhan Dr Abnish Singh Chauhan Hindi Literature Hindi Hindi Lyrics नवगीत  

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Friday, 20. July 2018 - 12:45 Uhr

अवनीश सिंह चौहान को दिनेश सिंह स्मृति सम्मान


abnish2-2लालगंज (रायबरेली): रविवार: 15 जुलाई 2018: बैसवारा इंटर कालेज के सभागार में कव्यालोक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने​ ​​'डॉ  शिवबहादुर सिंह भदौरिया की जयंती सम्मान समारोह'​ ​का भव्य आयोजन किया, जिसमें ​युवा नवगीतकार, आलोचक एवं सम्पादक डॉ अवनीश सिंह चौहान को स्मृतिपत्र​ ​समेत अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देक
​र​ 'दिनेश सिंह स्मृति सम्मान'​ ​से अलंकृत किया गया। यह सम्मान सुप्रतिष्ठित नवगीतकार, आलोचक एवं सम्पादक स्व दिनेश सिंह की स्मृति में प्रति वर्ष एक नवगीतकार को दिया जाता है।
 
पेशे से प्राध्यापक (अंग्रेजी)
​एवं ​
बहुआयामी रचनाकार डॉ अवनीश सिंह चौहान चौहान के नवगीत 'शब्दायन', 'गीत वसुधा', 'सहयात्री समय के', 'समकालीन गीत कोश', 'नयी सदी के गीत', 'गीत प्रसंग' आदि समवेत संकलनों में संकलित हो चुके हैं, जबकि आपकी तमाम रचनाएँ देश-विदेश के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आपके द्वारा सृजित आधा दर्जन से अधिक अंग्रेजी भाषा की पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों में पिछले 14 वर्षों से पढ़ी-पढाई जा रही हैं। हिन्दी भाषा में 2013 में प्रकाशित आपका गीत संग्रह 'टुकड़ा कागज़ का' काफी चर्चित हो चुका है। आपने 'बुद्धिनाथ मिश्र की रचनाधर्मिता' पुस्तक का संपादन किया है। आप वेब पत्रिका 'पूर्वाभास' और 'क्रिएशन एवं क्रिटिसिज़्म' (अँग्रेज़ी) के सम्पादक हैं। आपको 'अंतर्राष्ट्रीय कविता कोश सम्मान', मिशीगन- अमेरिका से 'बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड', राष्ट्रीय समाचार पत्र 'राजस्थान पत्रिका' का 'सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार', अभिव्यक्ति विश्वम् (अभिव्यक्ति एवं अनुभूति वेब पत्रिकाएं) का 'नवांकुर पुरस्कार', उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान-लखनऊ का 'हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान' आदि से अलंकृत किया जा चुका है।

कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धेय स्वामी भाष्करस्वरूप जी महाराज, संस्था के अध्यक्ष प्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ महादेव सिंह, संस्था के महामंत्री
​चर्चित साहित्यकार डॉ विनय भदौरिया आदि ने सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और उनकी पावन स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। वरिष्ठ लेखक-पत्रकार श्री नरेंद्र भदौरिया ने कहा कि स्व भदौरिया जी का साहित्यिक अवदान श्लाघनीय है; शायद तभी उनके गीत सुनकर आज भी ऐसा लगता है जैसे कोई हमारे दिल की बात कह रहा हो। प्रधानाचार्य रामप्रताप सिंह ने कहा कि डॉ भदौरिया की कविताओं में आक्रोश भी बड़े सहज ढंग से प्रस्तुत हुआ है; यह  कविताओं के माध्यम से उनके कहने का सलीका और साहस ही था कि उन्होंने लिखा कि 'ना काबिल पैताने के, बैठे हैं सिरहाने लोग। डॉ अवनीश सिंह चौहान ने जाने-माने नवगीतकार एवं नये-पुराने पत्रिका के यशस्वी संपादक स्व दिनेश सिंह​ ​से​ ​जुड़े​ ​कुछ रोचक संस्मरणों को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि श्रद्धेय डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी दिनेश सिंह जी के गुरुदेव रहे हैं और इस नाते वह मेरे दादा गुरु हुए।​ ​
 
इस पावन अवसर पर देशभर से पधारे अन्य साहित्यकार- श्रद्धेय श्री ओमप्रकाश अवस्थी, श्री नचिकेता, श्री रामनारायण रमण, श्री देवेन्द्र पाण्डेय देवन, श्री हरिनाम सिंह, श्री शीलेंद्र कुमार सिंह चौहान, श्री विनोद श्रीवास्तव एवं श्री सतीश कुमार सिंह को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सर्वश्री इंद्रेश सिंह भदौरिया, रमाकांत, राजेश सिंह फौजी, डॉ निरंजन राय, मनोज पांडेय, विश्वास बहादुर सिंह, चंद्रप्रकाश पांडेय, वासुदेव सिंह गौढ़ आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन शिक्षक नेता आशीष सिंह सेंगर ने किया और शिक्षाविद डॉ महादेव सिंह ने आभार व्यक्त किया।
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Thursday, 19. July 2018 - 13:11 Uhr

डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया जयंती सम्मान समारोह 2018


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बाएं से दाएं : डॉ महादेव सिंह, हरिनाम सिंह, देवेंद्र देवन, राम नारायण रमण, नरेंद्र भदौरिया, विनय भदौरिया, 

स्वामी भाष्कर स्वरुप जी महाराज, डॉ मिश्र, डॉ ओमप्रकाश अवस्थी, 

शीलेन्द्र सिंह चौहान, विनोद श्रीवास्तव, सतीश कुमार सिंह, डॉ अवनीश सिंह चौहान


​लालगंज (रायबरेली): रविवार: 15 जुलाई 2018: बैसवारा इंटर कालेज के सभागार में कव्यालोक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ने सुप्रसिद्ध गीतकार रहे डॉ शिवबहादुर सिंह भदौरिया की जयंती पर साहित्यकार सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया, जिसमें एक दर्जन से अधिक कवियों और साहित्यकारों को सुप्रसिद्ध साहित्यकारों के नाम का स्मृतिपत्र समेत अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित समीक्षक डॉ ओम प्रकाश अवस्थी (फतेहपुर) एवं वरिष्ठ कवि एवं आलोचक श्री नचिकेता (पटना) को 'डॉ शिवबहादुर सिंह भदौरिया स्मृति सम्मान', वरिष्ठ कवि एवं लेखक श्री रामनारायण रमण (डलमऊ-रायबरेली) को 'पंडित ब्रजनन्दन पांडेय स्मृति सम्मान', गीतकार श्री देवेंद्र पांडेय देवन (रायबरेली) को 'डॉ उपेंद्र बहादुर सिंह स्मृति सम्मान', शिक्षाविद एवं व्यंग्य कवि श्री हरिनाम सिंह को 'प्रो हरेन्द्र बहादुर सिंह सम्मान', वरिष्ठ नवगीतकार श्री शीलेंद्र सिंह चौहान (लखनऊ) को 'रामप्यारे श्रीवास्तव नीलम स्मृति सम्मान', वरिष्ठ नवगीतकार श्री विनोद श्रीवास्तव को 'मधुकर खरे स्मृति सम्मान', युवा नवगीतकार, आलोचक एवं सम्पादक डॉ अवनीश सिंह चौहान को 'दिनेश सिंह स्मृति सम्मान' एवं वरिष्ठ कवि श्री सतीश कुमार सिंह (सरेनी) को 'डॉ रामप्रकाश सिंह स्मृति सम्मान' से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री सुरेंद्र बहादुर सिंह, नगर पंचायत अध्यक्ष श्री रामबाबू गप्ता, पूर्व नपं अध्यक्ष श्री सुरेश नारायण सिंह 'बच्चा बाबू', वरिष्ठ लेखक श्री नरेंद्र भदौरिया को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धेय स्वामी भाष्करस्वरूप जी महाराज, संस्था के अध्यक्ष प्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ महादेव सिंह, संस्था के महामंत्री प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ विनय भदौरिया आदि ने स्व भदौरिया के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और उनकी पावन स्मृतियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। वरिष्ठ लेखक-पत्रकार श्री नरेंद्र भदौरिया ने कहा कि स्व भदौरिया का साहित्यिक अवदान श्लाघनीय है। शायद तभी उनके गीत सुनकर आज भी ऐसा लगता है जैसे कोई हमारे दिल की बात कह रहा हो। प्रधानाचार्य रामप्रताप सिंह ने कहा कि डॉ भदौरिया की कविताओं में आक्रोश भी बड़े सहज ढंग से प्रस्तुत हुआ है; यह कविताओं के माध्यम से उनके कहने का सलीका और साहस ही था कि उन्होंने लिखा कि 'ना काबिल पैताने के, बैठे हैं सिरहाने लोग।'

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ओमप्रकाश अवस्थी ने कहा कि डॉ भदौरिया एक अप्रतिम शब्द-शिल्पी थे। वरिष्ठ साहित्यकार श्री नचिकेता ने बताया कि कुव्यवस्था और अनाचार के विरुद्ध डॉ साहब ने कविता के माध्यम से जो भी लिखा है वह भावक को सहजरूप से प्रेरित करने में समर्थ है। श्री शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि 'पुरवा जो डोल गयी' और 'नदी का बहना मुझमें हो' ने स्व भदौरिया जी को अंतरराष्ट्रीय फलक पर पहचान दिलाने का काम किया है। डॉ अवनीश सिंह चौहान ने जाने-माने नवगीतकार एवं नये-पुराने पत्रिका के यशस्वी संपादक स्व दिनेश सिंह के कुछ रोचक संस्मरणों को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि श्रद्धेय डॉ शिव बहादुर सिंह भदौरिया जी दिनेश सिंह जी के
गुरुदेव रहे हैं और इस नाते वह मेरे दादा गुरु हुए।

 

इस अवसर पर 800 से अधिक श्रोताओं से भरे सभागार में सर्वश्री इंद्रेश सिंह भदौरिया,  रमाकांत, राजेश सिंह फौजी, डॉ निरंजन राय, मनोज पांडेय, विश्वास बहादुर सिंह, चंद्रप्रकाश पांडेय, वासुदेव सिंह गौढ़ आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन शिक्षक नेता आशीष सिंह सेंगर ने किया।


 

 

 

 


Dr Shiv Bahadur Singh Bhadauriya Jayanti Samman Samaroh 2018, Lalganj, Raebareli, U.P.

 
 

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Friday, 13. July 2018 - 14:09 Uhr

तीन प्रकार के मनुष्य - स्वामी रामदेवानन्द सरस्वती


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इस संसार में तीन प्रकार के मनुष्य होते हैं। एक होते है अर्थ शासित, दूसरे होते है दण्ड शासित और तीसरे होते हैं शास्त्र शासित।

 

अर्थ शासित वह लोग है जिन्हें पैसा देकर कुछ भी करवाया जासकता है। गलत से गलत। वह धन के लिये सारे संबंधो को समाप्त करने में भी देरी नही करते हैं।

 

दूसरे- दण्ड शासित लोग होते हैं, जिन्हें धमकाकर/डराकर गलत कार्य करा लिया जाता है। वे कई बार मजबूरी में या भयवश न चाहते हुये भी यह सब करते हैं।

 

तीसरे वह लोग होते है, जिन्हें शास्त्र शासित कहा जाता है। वे सर्वोच्च श्रेणी के व्यक्ति कहे जाते हैं। इनकों केवल और केवल शास्त्र से ही समझाया जासकता है; अन्य कोई उपाय नही होता है। लोभ या डर/धमकियों से वे उग्र तो हो सकते है, पर गलत कार्य नहीं कर सकते। प्रायः ऐसे लोग कम होते हैं; किन्तु होते अवश्य हैं। वे अपने प्राण त्यागने में भी संकोच नही करते (अर्थात प्राणों का मोह नहीं होता हैं)। अतः, स्थिति देखकर ही ऐसे महापुरुषों से व्यवहार करना चाहिये। सभी को एक दृष्टि से ही नही देखना चाहिये; ऐसा करने पर कभी-कभी भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

 

- श्रीमज्जगद्गुरु शंकराचार्य परम्परा संवाहक स्वामी रामदेवानन्द सरस्वती, उमा शक्ति पीठ, वृन्दावन, मथुरा।


Post by Abnish Singh Chauhan

 


Tags: NEWS Hindi Spiritual Lesson 

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