ISSN 2277 260X   

 

International Journal of

Higher Education and Research


 

 

Thursday, 12. April 2018 - 15:04 Uhr

टुकड़ा कागज़ का के बहाने


अवनीश सिंह चौहान का नवगीत संग्रह 'टुकड़ा कागज का' पढ़ते हुए मुझे श्रीप्रकाश मिश्र की बात याद आई, इसे पढ़कर लगा कि इसमें संग्रहीत जो गीत हैं वे समकालीन हिन्दी कविता के कथ्य और तथ्य से बहुत गहरे जुड़ते नजर आते हैं। इन गीतों में न तो कोरी भावुकता है न कोरी बौद्धिकता, जिस तरह निराला के बाद की कविता की चर्चा करते वक्त हम अज्ञेय, मुक्तिबोध, नागार्जुन, रघुवीर सहाय, शमशेर, धर्मवीर भारती, केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण, श्रीकांत वर्मा, धूमिल वगैरह का नाम धड़ाधड़ लेते जाते हैं वैसे गीतकारों की कोई श्रंखला नहीं बन पाती, किन्तु दिनेश सिंह, वीरेंद्र आस्तिक, बुद्धिनाथ मिश्र, कुँवर बेचैन, कैलाश गौतम, यश मालवीय, सुधांशु उपाध्याय आदि की एक अलग परम्परा जरूर दिखाई पड़ती है जिसने गीत-नवगीत को समकालीन कविता जैसी चुनौतियों के समकक्ष खुद को उभारा। … समकालीन हिन्दी नवगीत विधा में अवनीश सिंह चौहान का यह संग्रह और इसमें संग्रहीत गीत एक उपलब्धि और योगदान के रूप में जाने जायेंगे। 


- श्री रंग, वरिष्ठ कवि एवं आलोचक, इलाहाबाद, उ. प्र.


 tkk-1


Tags: Hindi Dr Abnish Singh Abnish Singh Chauhan Hindi Literature Hindi Lyrics 

114 Views

0 Comments

Wednesday, 21. March 2018 - 18:45 Uhr

रामनारायण रमण कृत नदी कहना जानती है पर साहित्यिक चर्चा


img-20180311-124345रायबरेली। भीतर से बाहर तक नदी के अविरल, लयबद्ध, कल्याणकारी भाव को समोये वरिष्ठ साहित्यकार श्रद्देय रामनारायण रमण जी का सद्य: प्रकाशित नवगीत संग्रह 'नदी कहना जानती है' का भव्य लोकार्पण लेखागार सभागार में रविवार, 11 मार्च को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं अतिथियों के स्वागत-सत्कार से हुआ। 
 
इस उत्कृष्ट कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं आलोचक डॉ ओमप्रकाश सिंह  ने की, जबकि दिल्ली से पधारे युवा कवि एवं आलोचक डॉ अवनीश सिंह चौहान मुख्य अतिथि एवं  सुपरिचित ग़ज़लगो नाज़ प्रतापगढ़ी  विशिष्ट अतिथि रहे। डॉ ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि रमण जी के गीत समकालीन सन्दर्भों को मजबूती से व्यंजित कर रहे हैं और उनमें संवेदना की गहराई है। उन्होंने मजदूर, किसान, गांव, शहर, बेरोजगारी जैसे विषयों को अपने नवगीतों में बखूबी पिरोया है। डॉ अवनीश चौहान ने रमण जी के तमाम नवगीतों के अर्थ खोलते हुए उनकी सुंदर अनुभूतियों की सराहना की और कहा कि उनके साधु स्वभाव का प्रभाव उनके टटके गीतों में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने बताया कि रमण जी के गीतों की भाषा प्रयोगधर्मी है और उनके शब्द गहन एवं नवीन हैं। नाज़ प्रतापगढ़ी ने रमण जी के नवगीतों में उर्दू भाषा के शब्दों के संतुलित प्रयोग एवं रचना कौशल की सराहना की। सुविख्यात गीतकार डॉ विनय भदौरिया ने रमण जी के शीर्षक गीत 'नदी कहना जानती है'  की विस्तार से चर्चा की और उनके गीतों को प्रेम में पगा हुआ बताया। सुप्रसिद्ध आलोचक एवं साहित्यकार रमाकांत  ने रमणजी को सर्वथा मौलिक गीतकार मानते हुए कहा कि उन्होंने जो भी लिखा वह अनुभवजन्य सत्य है, इसे पोस्ट-ट्रुथ के युग में भी नाकारा नहीं जा सकता।   
 
चर्चा-परिचर्चा में अन्य साहित्यकारों, विचारकों, आलोचकों ने एक स्वर में कहा कि रमण जी के ताज़ातरीन नवगीत साहित्य, समाज, संस्कृति को पूरी वस्तुनिष्ठता एवं मौलिकता से प्रस्तुत करते हैं। रायबरेली के सशक्त रचनाकार एव साहित्यप्रेमी सर्वश्री आनंदस्वरूप श्रीवास्तव, राजेन्द्र बहादुर सिंह राजन, शिवकुमार शास्त्री, सन्तोष डे, प्रमोद प्रखर, डॉ राकेश चन्द्रा, हीरालाल यादव, दुर्गाशंकर वर्मा, हीरालाल यादव, डॉ राज आदि के सार्थक वक्तव्यों ने लोकार्पण समारोह को जीवंत बना दिया। मंच का शानदार संचालन चर्चित साहित्यकार जय चक्रवर्ती जी एवं डॉ विनय भदौरिया जी ने संयुक्तरूप से किया। आभार अभिव्यक्ति कार्यक्रम संयोजक रमाकान्त जी ने की।


img-20180311-124306img-20180311-123658img-20180311-124140img-20180311-124145img-20180311-124545img-20180312-113933img-20180311-121251


Tags: Hindi Literature Hindi Lyrics Hindi 

199 Views

0 Comments

Monday, 19. March 2018 - 16:24 Uhr

दुआओं में याद रखना- डॉ अवनीश चौहान


abnish-singh-chauhan-2देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से जब मैंने पीएचडी की थी, तब मेरी गाइड आदरणीया प्रोफेसर प्राची दीक्षित जी एवं एक्स्पर्ट जेएनयू के पूर्व उपकुलपति एवं अंग्रेजी विभागाध्यक्ष श्रद्धेय प्रोफेसर कपिल कपूर जी ने मुझसे कोई गिफ्ट (लिफाफा) नहीं लिया; बस विश्विद्यालय से जो मानदेय मिला, वही लिया। मैंने अपने पिता जी, जिन्होंने स्वयं कभी किसी से रिश्वत या अन्य कोई सेवा नहीं ली, को यह बात बताई, तो बहुत प्रसन्न हुए। मुझसे बोले, "मुझे वचन दो कि जीवन में तुम कभी किसी छात्र या अन्य किसी से कोई गिफ्ट (लिफाफा) या सेवा नहीं लोगे।"

 

आज एस वी विश्विद्यालय, गजरौला, अमरोहा में पीएचडी वाइवा (अंग्रेजी) लेने जाने का सुअवसर मिला। आदरणीया डॉ मधुवाला सक्सेना जी की अध्ययनशील छात्रा उरूज जी ने जब वाइवा के बाद उपहार (लिफाफा) देना चाहा (इसमें उनका कोई दोष नहीं, हो सकता है कि उन्होंने इस चलन के बारे में कहीं से सुन रखा हो), तो मैंने यह कह कर मना कर दिया कि कुछ देना ही है तो मुझे अपनी दुआओं में याद कर लेना। भद्र महिला उरूज जी दुबई से हैं और उन्होंने अपने पति को एक किडनी दान की है। उरूज जी के इस त्याग को प्रणाम कर घर आ गया। आज मन बहुत प्रसन्न है।


 


Tags: Hindi Literature Hindi Memoirs 

199 Views

0 Comments

Wednesday, 7. March 2018 - 18:56 Uhr

स्वर दीप यज्ञ का भव्य आयोजन


img-20180306-wa0020

मुरादाबाद : मार्च 04, 2018। पंडित मदनमोहन गोस्वामी संगीत अकादमी, मुरादाबाद के तत्वावधान में स्वर दीप यज्ञ का भव्य आयोजन रविवार शाम पंचायत भवन के ऑडिटोरियम में हुआ। अकादमी के अधिष्ठाता युवा संगीतज्ञ डॉ विनीत गोस्वामी के निर्देशन में 100 से अधिक प्रशिक्षु संगीतज्ञों ने शानदार प्रस्तुतियां दी। दिल्ली से पधारी डॉ सोमा सिंह ने शास्त्रीय संगीत के माध्यम से शमा बाँध दिया। इस कार्यक्रम में एमएलसी डॉ जयपाल सिंह व्यस्त, नगर विधायक रीतेश गुप्ता जी, मेयर विनोद अग्रवाल जी, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सुरेश जैन जी एवं मनीष जैन जी, वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य देवेन्द्र देव जी एवं नवगीतकार दादा माहेश्वर तिवारी जी, युवा तबला वादक सुकान्तो बाजपेयी जी, युवा कवि एवं आलोचक डॉ अवनीश सिंह चौहान, शिक्षाविद डॉ सत्यवीर सिंह चौहान, साहित्यकार मनोज मनु जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। जनपद की शान बाबा संजीव आकांक्षी जी ने बेहतरीन मंच संचालन किया। कार्यक्रम संयोजक डॉ विनीत जी, डॉ नवनीत गोस्वामी एवं डॉ रचना गोस्वामी ने आभार अभिव्यक्ति की।


fb-img-1520213930369-1fb-img-1520213873001img-20180306-wa0016img-20180306-wa0003img-20180305-wa0002


 


Tags: Hindi NEWS Music Sound 

191 Views

0 Comments

Sunday, 11. February 2018 - 19:15 Uhr

गीत प्रसंग- एक महत्वपूर्ण संकलन


geet-prasang

 

प्रिय मित्र सौरभ पाण्डेय जी द्वारा संपादित 'गीत प्रसंग' (गीत/नवगीत संकलन) की एक प्रति कल डाक से प्राप्त हुई। 50 गीतकारों की तीन-चार रचनाओं के साथ सार्थक सम्पादकीय से लैस इस महत्वपूर्ण संकलन को रेड ग्रेब बुक्स ने प्रकाशित किया है। पृष्ठ- 210। मूल्य- 225/-। प्रकाशन वर्ष- जनवरी 2018। इस संकलन में मेरे गीतों को स्थान देने के लिए सौरभजी और प्रकाशक वीनस केसरी जी का हृदय से आभार। इसमें प्रकाशित अन्य सभी रचनाकारों को साधुवाद एवं शुभकामनाएं।

- डॉ अवनीश सिंह चौहान


geet-prasang-1

geet-prasang-3


 


Tags: Neo-lyrics Hindi Lyrics Hindi NEWS 

166 Views

0 Comments



Weitere 1 Nachrichten nachladen...